FIR रद्दीकरण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘ऐसे नहीं कैंसल हो सकती एफआईआर’, हाई कोर्ट का आदेश किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि एफआईआर (FIR) को बिना पर्याप्त और ठोस कानूनी आधार के यूं ही कैंसल नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट के फैसले पर रोक: शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की एफआईआर को समय से पहले ही खारिज कर दिया गया था।

‘मिनी-ट्रायल’ की अनुमति नहीं: जस्टिस की पीठ ने दोहराया कि एफआईआर रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते समय हाई कोर्ट को मामले का ‘मिनी-ट्रायल’ शुरू करने का अधिकार नहीं है।

प्रथम दृष्टया मामला जरूरी: कोर्ट ने कहा कि अगर एफआईआर के तथ्यों से प्रथम दृष्टया (Prima Facie) किसी संज्ञेय अपराध के होने का संकेत मिलता है, तो जांच पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।

जांच एजेंसी के अधिकार: सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, पुलिस और जांच एजेंसियों को निष्पक्षता से सच्चाई सामने लाने के लिए पूरी जांच करने का मौका मिलना चाहिए।

असाधारण शक्तियों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल: अदालत ने कहा कि एफआईआर रद्द करने की अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग केवल बेहद दुर्लभ और अपवादजनक मामलों में ही किया जाना चाहिए।

पीड़ित की याचिका पर फैसला: पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि हाई कोर्ट ने सबूतों के मूल्यांकन में जल्दबाजी दिखाते हुए आरोपी को अनुचित राहत दी है।

आरोपों की गंभीरता: सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, जिनकी निष्पक्ष और गहन जांच होना न्याय के हित में आवश्यक है।

जांच प्रक्रिया जारी रखने के निर्देश: शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अब संबंधित जांच एजेंसी कानून के मुताबिक अपनी जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगी।

कानूनी नजीर: इस फैसले से यह संदेश साफ हो गया है कि आपराधिक मामलों में कानूनी प्रक्रिया को शुरुआती चरण में ही रोकने के लिए हाई कोर्ट्स अपनी शक्तियों का मनमाना इस्तेमाल नहीं कर सकते।