Ganesh Chaturthi 2026: देश भर में गणपति बप्पा मोर्या की गूंज; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और गणेश उत्सव का संपूर्ण महत्वg
TheHind24 डिजिटल डेस्क: सनातन धर्म में किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य की शुरुआत भगवान श्री गणेश की आराधना के बिना अधूरी मानी जाती है। विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और रिद्धि-सिद्धि के स्वामी भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव का पावन पर्व ‘गणेश चतुर्थी’ (Ganesh Chaturthi) पूरे देश में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है।
10 दिनों तक चलने वाले इस महाउत्सव में घर-घर और बड़े-बड़े पूजा पंडालों में ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया’ के जयकारे गूंज रहे हैं। TheHind24 की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व, स्थापना का शुभ मुहूर्त, प्रामाणिक पूजा विधि और इस पर्व का सांस्कृतिक पहलू।
1. गणेश चतुर्थी का धार्मिक एवं पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को माता पार्वती के पुन्य-प्रताप और भगवान शिव के आशीर्वाद से भगवान श्री गणेश का प्राकट्य हुआ था। इसीलिए इस तिथि को गणेश जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
भगवान गणेश को ‘प्रथम पूज्य’ का वरदान प्राप्त है। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन विधि-विधान से प्रथम पूज्य की स्थापना और पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न (बाधाएं) दूर होते हैं, सुख-समृद्धि का वास होता है और व्यापार व शिक्षा में अपार सफलता मिलती है।
2. वक्रतुण्ड महाकाय श्लोक और इसका अर्थ
गणेश पूजन में इस सिद्ध श्लोक का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ: घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर वाले और करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव भगवान श्री गणेश! आप कृपा करके मेरे सभी कार्यों को बिना किसी बाधा (निर्विघ्न) के सदैव पूर्ण करें।
3. गणेश स्थापना एवं पूजन का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना सदैव शुभ चौघड़िया और मध्याह्न (दोपहर) काल में करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी
- गणेश स्थापना मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक (विशेष फलदायी)
- अमृत/शुभ चौघड़िया: प्रातःकाल से ही बप्पा के स्वागत के लिए शुभ समय उपलब्ध रहेगा।
(नोट: स्थान भेद के अनुसार लोकल पंचांग में समय का थोड़ा अंतर हो सकता है।)
4. गणपति स्थापना और पूजन की सरल एवं प्रामाणिक विधि
यदि आप अपने घर या संस्थान में गणपति बप्पा की स्थापना कर रहे हैं, तो इन नियमों का पालन करें:
- स्थान की शुद्धि: पूजा स्थल को साफ कर उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें।
- पीला/लाल वस्त्र: चौकी पर लाल या पीला स्वच्छ कपड़ा बिछाएं और उस पर चावल (अक्षत) का अष्टदल कमल बनाएं।
- प्रतिमा की स्थापना: भगवान गणेश की मिट्टी की सुंदर प्रतिमा स्थापित करें।
- संकल्प और प्राण प्रतिष्ठा: बप्पा को दूर्वा (दूब घास), मोदक, लड्डू, लाल पुष्प (गुड़हल), रोली, चंदन, अक्षत और वस्त्र अर्पित करें।
- आरती एवं भोग: धूप-दीप जलाकर ‘जय गणेश जय गणेश देवा’ की आरती करें और बप्पा को प्रिय मोदक का भोग लगाएं।
5. पर्यावरण-अनुकूल (Eco-Friendly) गणेश उत्सव का संदेश
आज के समय में प्रकृति संरक्षण भी एक महान सेवा है। TheHind24 अपने सभी पाठकों और दर्शकों से अपील करता है कि इस गणेशोत्सव में मिट्टी (M मिट्टी/Clay) से बनी ‘इको-फ्रेंडली’ गणेश प्रतिमाओं का ही उपयोग करें। रासायनिक रंगों और प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की मूर्तियों से परहेज कर अपनी नदियों और जल स्रोतों को स्वच्छ रखने में सहयोग दें।
6. TheHind24 की ओर से आप सभी को शुभकामनाएं
विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश आप सभी के जीवन से हर प्रकार के कष्ट, रोग और बाधाओं को दूर करें तथा सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।
॥ गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया ॥
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