काठमांडू / नई दिल्ली (TheHind24):
नेपाल-चीन सीमा पर लांगटांग क्षेत्र के पास हुए भीषण ग्लेशियर हादसे के बाद भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी प्रलय ने भारी तबाही मचाई है। 26 अगस्त को हुए इस हादसे में अब तक 680 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2,400 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रलय का असर भारत के उत्तर प्रदेश सीमावर्ती क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है, जहां गंडक (नारायणी) नदी में बहकर आ रहे कई अज्ञात शवों को कुशीनगर जिला प्रशासन ने बरामद किया है।
कैसे आई प्रलय: भूकंप नहीं, ग्लेशियर का टूटना बनी वजह
शुरुआती रिपोर्टों में भूगर्भीय झटकों (भूकंप) की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) और उपग्रह तस्वीरों के अनुसार, यह तबाही समुद्र तल से लगभग 5,000 मीटर की ऊंचाई पर एक विशाल ग्लेशियर के टूटने और मलबे के तेजी से नदी में गिरने के कारण हुई।
पहाड़ से टूटी बर्फ और मलबे के तेज बहाव ने भोटे कोशी और त्रिशूली नदी घाटी को पूरी तरह जलमग्न कर दिया। इसके प्रभाव से 5.2 की तीव्रता के समान झटके दर्ज किए गए।
तबाही का प्रमुख ब्यौरा
- भीषण जनहानि: नेपाल के रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट जिलों में सबसे ज्यादा तबाही हुई है। कई गांव मलबे और पानी के तेज बहाव में बह गए।
- भारतीय तीर्थयात्री लापता: कैलाश मानसरोवर और स्थानीय तीर्थयात्रा पर गए सैकड़ों भारतीय नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं।
- अंतरराष्ट्रीय सीमा व्यापार ठप: चीन और नेपाल को जोड़ने वाला प्रमुख ‘गिरोंग पोर्ट’ (Gyirong Port) और सीमावर्ती पुल पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
- बिजली व बुनियादी ढांचा नष्ट: कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, पुल और सड़कें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर तक पहुंचा दर्द
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा के बाद नदी के तेज बहाव के साथ शव बहकर भारतीय सीमा में पहुंच रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में गंडक नदी से अब तक 7 अज्ञात शव बरामद किए जा चुके हैं। कुशीनगर जिला प्रशासन ने इन शवों को पहचान के लिए जिला अस्पताल के डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा है और नेपाल सीमावर्ती अधिकारियों से लगातार संपर्क स्थापित कर रहा है।
राहत और बचाव कार्य जारी
नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां दुर्गम पहाड़ी इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। मुख्य पुलों के टूटने और रास्तों के बह जाने के कारण राहत टीमों को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

