फीफा का बड़ा फैसला: वर्ल्ड कप में प्राइवेट पार्टनरशिप की विवादित योजना रद्द, यूरोपीय देशों के कड़े विरोध के आगे झुकी संस्था

THE HIND 24

नई दिल्ली / स्पोर्ट्स डेस्क:

दुनिया भर में फुटबॉल का संचालन करने वाली संस्था फीफा (FIFA) ने वर्ल्ड कप में निजी निवेशकों (Private Investors) को हिस्सेदारी बेचने की अपनी विवादित योजना को पूरी तरह से वापस ले लिया है। कई महाद्वीपीय फुटबॉल संघों के जबरदस्त विरोध और यूरोपीय देशों द्वारा भविष्य के विश्व कप टूर्नामेंट का बहिष्कार करने की चेतावनी के बाद फीफा को यह कदम उठाना पड़ा है।

विरोध के बाद बैकफुट पर फीफा

इस प्रस्ताव को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। यूरोपीय फुटबॉल संघों और कई अन्य महाद्वीपीय फेडरेशनों का मानना था कि वर्ल्ड कप में प्राइवेट प्लेयर्स की हिस्सेदारी से खेल की स्वायत्तता और इसकी गरिमा पर बुरा असर पड़ेगा। बात तब और बिगड़ गई जब यूरोप ने साफ चेतावनी दे दी कि अगर यह योजना लागू हुई तो वे आने वाले वर्ल्ड कप टूर्नामेंट्स में हिस्सा नहीं लेंगे।

फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो का बयान

शुक्रवार को इस फैसले की औपचारिक घोषणा करते हुए फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो (Gianni Infantino) ने कहा:

“हमने सभी पक्षों और फुटबॉल संघों के विचारों को बहुत गहराई से सुना है। इसके बाद यह बिल्कुल साफ हो गया है कि इस प्रोजेक्ट की वजह से ऐसे मतभेद पैदा हो रहे थे, जो खेल के मूल हितों के खिलाफ हैं। भले ही इसे कुछ लोगों का समर्थन हासिल था, लेकिन खेल की एकजुटता हमारे लिए सबसे ऊपर है।”

क्यों हो रहा था इस योजना का विरोध?

खेल का व्यवसायीकरण: आलोचकों का तर्क था कि प्राइवेट निवेशकों के आने से टूर्नामेंट पूरी तरह व्यावसायिक हो जाएगा।

यूरोपीय संघों की नाराजगी: यूरोप के बड़े फुटबॉल देशों का मानना था कि इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में बाहरी ताकतों का हस्तक्षेप बढ़ेगा।

बॉयकॉट का खतरा: यूरोपीय देशों की ओर से मिले कड़े अल्टीमेटम ने फीफा को योजना तुरंत रद्द करने पर मजबूर कर दिया।

इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि फीफा वर्ल्ड कप के अधिकार और इसके संचालन की कमान पूरी तरह से खेल संस्थाओं के पास ही रहेगी।